साहित्य

चाँद

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

मतलब जिंदगी का चाँद बतलाता मुस्कुराता।।
जिंदा रहने का इल्म हुनर दुःख दर्द सुख चाँद दुनियां को सीखलाता।।
चाँद कहता है तमश धीरे धीरे मुझको निगलता जाता हारता नही मैं अंधेरे से फिर नए जोश से अंधेरे को हराता आता।।
दाग दामन का मेरे मुझको शर्मिंदा
नही करता मेरा दाग भी दुनिया का प्यारा।।
लिखता तकदीर अपने ही करम से
अपनी तकदीर बनाता।।
आग सूरज में बहुत जलना गर्मी फितरत उसकी मैं तो शीतल छँव में दुनियां को सुलाता।।
नींद में ख्वाब हसीन जगाता ,सूरज के आने से पहले दुनियां को खबों की दुनियां सौंप हकीकत हद हस्ती चाहत गुजरना जीना सिखलाता।।
मेरा तो दुनियां में प्रेम मोहब्बत ही वजूद कोई हुस्न की मल्लिका चेहरों में मेरा दीदार है पाता।।
कच्चे धाँगो के रिश्ते में बंधा हूँ हर बचपन का चंदा मामा कहलाता।।
बचपन की शरारत जिद मेरी चाहत मैँ चाँद माँ बाप की आशाओं का नाता।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

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