कवितासाहित्य

चाटुकार से सावधान

__अमर सिंह राय

मुँह देखी व्यवहार करें जो,
बोलें हरदम जी सरकार।
झूँठी करें प्रसंशा सम्मुख,
वह कहलाते चाटुकार।

जी-हुजूरी में अव्वल यह,
स्वार्थी रहता है अंतर्मन।
मधु-रस वाणी से टपकाते,
नहीं बोलते कटुक वचन।

मान प्रतिष्ठा की न चिंता,
स्तर से नीचे गिर जाते।
चापलूस,चमचा,पिछलग्गू,
केवल अपना काम बनाते।

मानी जाती है दुनियाँ में,
सूरत से भी सीरत अच्छी।
लेकिन फक्क उजालों के,
मन कपटी हैं और कुलक्षी।

अगर आपकी आपके आगे,
करे प्रसंशा और बखान।
सहसा बातों में न आना,
चाटुकार से सावधान।।

मौलिक/अप्रकाशित-

             अमर सिंह राय
                नौगांव, मध्यप्रदेश
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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