साहित्य

चुनाव

प्रतिभा जैन

जब से सुना चुनाव आने वाला है,
गरीबों की आँखों में फिर सपना छाने वाला है।

क़लम से एक नया नाम लिखने वाला है, आज फिर एक कुर्सी के लिये घमा-सान होने वाला है,

कोई खोयेगा सब कुछ इसमें अपना, तो कोई बहुत कुछ पाने वाला है।

जो बरसों से गायब थे इस शहर से, उनका फिर आशियाना बसाने वाला है ।

फिर होगी वादों और कसमों की बौछारें, फिर नया एक श्लोगन आने वाला है।

कई साँसों की उम्मीदे होगी इसमें दफन, कोई मरकर भी फिर जीने वाला है,

कुर्सी की खातिर होंगे कई अपने बेगाने, नही टिकेगा रिश्ता ये टूट जाने वाला है।

होगी जिसमें “प्रतिभा” वहीं पीछे रह जायेगा, जितेगा वो जो दौलत लुटाने वाला है।

प्रतिभा जैन
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश

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