साहित्य

चेहरे पर चेहरा

चेहरे पर चेहरा सजाते हैं लोग ,
मौसम से जल्दी बदल जाते हैं लोग ।

है मुखौटा भी झूठा हकीकत भी झूठी ,
न जाने बेगानी सी जिंदगी कैसे बिताते हैं लोग।

मतलब के लिए रिश्ते निभाते हैं लोग ,
बाद मतलब के अक्सर बदल जाते हैं लोग ।

चेहरे पर चेहरा सजाते हैं लोग ,
मौसम से जल्दी बदल जाते हैं लोग ।

झूठे आंँसू अक्सर बहाते हैं लोग,
देख अपनों को दुखी मुस्कुराते हैं लोग ।

पाने को ललायित हर पल होते हैं लोग,
देने में अक्सर मुकर जाते हैं लोग ।

स्नेह प्रेम से दूर रहकर अक्सर ,
धन वैभव से प्रीत लगाते हैं लोग ।

चेहरे पर चेहरा सजाते हैं लोग ,
मौसम से जल्दी बदल जाते हैं लोग।।

पूनम शर्मा स्नेहिल

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