कवितासाहित्य

चेहरे पर चेहरे

__मनजीत कौर


चेहरे पर चेहरे वह लगाता
असलियत अपनी वह छिपाता
दूजा उसे समझ न पाता
एक पहेली वह बन जाता
चेहरे के पीछे है चेहरा
चेहरे के आगे है चेहरा
न जाने कितने चेहरे हैं
कौनसा असली कौनसा नकली
जान पाना है मुश्किल
चेहरे पर चेहरे वह लगाता
असलियत अपनी वह छिपाता

भीतर उसके ज़हर  भरा
ऊपर से अमृत छलकाता
अन्दर उसकी क्रोध भरा
बाहर से वह शांत दिखता
भीतर बहे नफरत का सोता
बाहर प्यार का ढोंग करता
भीतर बहे नफरत का सोता
बाहर प्यार का ढोंग करता
चेहरे पर चेहरा वह लगाता
असलियत अपनी वह छिपाता

अन्दर गहरा दुख समाया
बाहर  ठहाके  वह लगाए
भीतर उसके ज्वाला धधके
बाहर प्रीत का ढोंग रचाए
शराफत  का चेहरा वह ओढ़े
अनैतिक  वह काम  करे
अपने पराये  की पहचान है  मुश्किल
अन्दर कुछ, बाहर कुछ और दिखे
चेहरे पर चेहरा वह लगाता
असलियत अपनी वह छिपाता

संत का मुखौटा  वह ओढ़े
डाकू  का वह काम करे
अन्दर है  दिल बेचैन
चेहरे पर सुकून दिखे
मन में भरी कड़वाहट है
बोले मीठे बोल है
बाहर अपनापन जताता
अनादर दूरियाँ वह बढ़ाता
सच का ढोंग करने वाले
झूठ बिना नहीं रहने वाले
चेहरे पर चेहरा वह लगाता
असलियत अपनी वह छिपाता

मनजीत कौर
हुबली
कर्नाटक

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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