साहित्य

चौपाई

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’

कमल नयन हरि के अवतारे।
त्रेतायुग में अवध पधारे।।
सुंदर सुकोमल रूप न्यारा।
देख पावन हुआ जग सारा।।

      अपने संग अनुज को लाए।
      नृप दशरथ के मान बढ़ाए।।
      कौशल्या नयनों  का तारा।
      दशरथ  नंदन  राजदुलारा।।

सभी रानियाँ अति हरसायीं।
राजमहल में खुशियाँ छायीं।।
सभी देखने उनको आए।
लखकर अपने नयन जुड़ाये।।

      राजा  दशरथ  विप्र  बुलाए।
      सुकुमारों  का  नाम  धराए।।
      राम,भरत, लक्ष्मण अति भाए।
      अनुज भ्रात शत्रुघ्न कहाये।।

पाँवन घुँघरू रुनझुन बाजे।
घुँघरल बाल अंग पर साजे।।
रूप मनोहर है अति प्यारा।
बना हुआ नयनों का तारा।।

    तीनों अनुज सहित  रघुराई।
    करने   आये   वेद   पढ़ाई।।
    गुरु वशिष्ठ के गुरुकुलआये।
    अल्पकाल विद्या सब पाये।।

         कुमकुम कुमारी 'काव्याकृति'
              योगनगरी मुंगेर, बिहार
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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