कवितासाहित्य

छू लेने दो आसमान

__कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’

हौसलों की उड़ान अभी बाँकी है,
दिल में अरमान अभी बाँकी है,
छूना है आसमान को मुझको,
अभी तो ऊँची उड़ान बाँकी है।

गिर-गिर कर चलना सीखा है मैंने,
अभी तो ऊँची छलाँग बाँकी है,
उड़ना है उन्मुक्त गगन में मुझको,
अभी तो पूरा आसमान बाँकी है।

देखो,कोई रोको न मुझको,
रोको न मुझको, टोको न मुझको,
क्या हुआ?जो एक पर टूट गया,
अभी तो दिल में तूफान बाँकी है।

करनी है यारी सितारों से मुझको,
भरना है मुट्ठी में आसमान को ,
अभी तो एक ही पहलू दिखाया है मैंने,
अभी तो पूरी पहचान बाँकी है।

          कुमकुम कुमारी 'काव्याकृति'
              योगनगरी मुंगेर, बिहार
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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