कवितासाहित्य

जय यमुना मैया की

कई पावन नदियों में से एक यमुना
गंगा,यमुना और सरस्वती के संगम से
हर प्राणी का जन्म सफल हो जाता है
पर आज पीड़ा वो सहती हूं
निर्मल जल आज दूषित हुआ है
आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाती हूं

सुनो आज मेरी वाणी
मैं भी जीना चाहती हूं
कलकल करती सभी नदियों की तरह
साफ स्वच्छ रहना चाहती हूं
चार धाम भी यमुनोत्री के बिना अपूर्ण
मैं ही उत्तरकाशी से प्रयाग में मिल जाती हूं
मैं यमुना हूं अपनी दुर्दशा पर आसूं बहाती हूं

मैं शनि और यम की बहन यमुना हूं
भाई बहन के प्यार की साक्षी हूं
मेरे ही वर से लोग यमलोक नहीं गौलोक जाते हैं
मैं ही मथुरा से कान्हा के गोकुल जाने की गवाह हूं
राधा कृष्ण की प्रेम की लीला की साक्षी हूं
बृज की संस्कृति मेरे बिना अधूरी है
पर आज मैं अपनी दुर्दशा पर आसूं बहाती हूं

कुंठित है मेरा मन देख ये गंदगी
आज ये कैसी सफेदी मुझ पर छाई है
छठ पूजा पर आस्था और विश्वास का प्रतीक हूं
आज देख मुझे लोग घिनाते है
मुझ में स्नान कर मेरे ही बच्चे बीमार हो जाते है
देख ये सब आज अपनी दुर्दशा पर आसूं बहाती हूं

त्रहि त्रहि करता मेरा बेबस मन है
आज तो कोई इस यमुना मां का दर्द सुनो
जल ही जीवन इस मंत्र को सार्थक करो
मेरी इस दुर्दशा का कोई और नही
तुम ही गुनहगार हो
आज अपनी गलती पहचानों
मुझे पहले जैसी अपनी यमुना मैया बनाओ।

-पूजा भारद्वाज

नई दिल्ली

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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