साहित्य

जिंदगी छल रही है…..

किरण झा


जिंदगी छल रही है करके अपनी मेहरबानी
समझ में कुछ ना आए,भर गया आंखों में पानी

ना जाने कैसी है खूबी, बहुत ये तेज भागे
दुनिया है इसके पीछे,और ये सबसे आगे
कोई ना समझ है पाया,होती सबको हैरानी
जिंदगी छल रही है,करके अपनी मेहरबानी

कभी ये है हंसाती,कभी ये है रूलाती
वक्त ये बीता जाता नहीं कुछ भी समझाती
ठहरना बड़ा कठिन है,ये दुनिया है आनी जानी
जिंदगी छल रही है करके अपनी मेहरबानी

रहती ख़ामोश सदा ये,अपनी धुन में चलती है
कितनी भी आवाज लगाओ, पीछे नहीं मुड़ती है
लेती इम्तिहान सभी का,ना कर “किरण” नादानी
जिंदगी छल रही है,करके अपनी मेहरबानी

किरण झा ✍🏻
रांची, झारखंड

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