साहित्य

जिम्मेदारी

नंदिनी लहेजा

केवल ना समझो जिम्मेदारी मुझे,
मैं भी अंश हूँ आपकी बाबा।
जिस तरह भैया चिराग कुल के आपके,
मैं भी रौशनी आपके घर की बाबा।
रहते हो चिंतित बाबा,ब्याह को लेकर मेरे।
रात दिन करते मेहनत,दहेज़ जोड़ने के लिए।
सोचते हो बिदा कर मुझे,
जिम्मेदारी से मुक्त हो जाओगे।
पर बाबा दहेज़ का धन ,
कैसे अकेले जमा कर पाओगे।
बाबा मैं केवल आपकी जिम्मेदारी नहीं,
पर आपकी जिम्मेदारी को,
साझा करना चाहती हूँ।
अपने शिक्षित किया मुझे,
इस जिम्मेदारी को भी तो निभाया,
अब मैं नौकरी करना चाहती हूँ।
भैया छोटा है बाबा, उसे भी तो आगे है पढ़ना।
मुझको नहीं ब्याह कर दहेज लोभियों घर जाना।

नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

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