कवितासाहित्य

जिस दिन हमारी सादगी श्रृंगार हो जाएगी

__राजेश राठौर झूमका

जिस दिन हमारी सादगी श्रृंगार हो जाएगी
यकीन मानिए दोस्तों उस दिन आईने की हार हो जाएगी!!

खूबसूरती छिप जाएगी आकाश के आगोश में
दिल्लगी उस दिन परवान चढ बंदगी हो जाए!!

कहानी किस्तों में सुनाया जाएगा श्रृंगार को
ख़ुबसूरती ज़माने भर की उस दिन निराधार हो जाएगी!!

आईने से कह दो हमें तेरे प्रतिबिंब की ज़रूरत नहीं
आईना बन हमारी ख़ुबसरती ख़ुद आईना हो जाएगी!!

सादगी से बढ़कर कोई ख़ुबसूरत दुनिया में होती नहीं
दिखा देंगे ज़माने को सादगी अमर हो जाएगी!!

सादगी से जीता जा सकता है दुनिया में हर इक दिल को
सादगी में रमा ईश्वर सादगी ईश्वर हो जाएगी!!

राजेश राठौर झूमका

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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