कवितासाहित्य

जीवन की आधारशिला

:अशोक दोशी

किसी भी जीवन की शुरूआत
या जीवन की आधार शिला का
बाल बचपन से
ही होता है न्यास !

मां बाप द्वारा प्रदत संस्कारों से
बाल मन का
होता विन्यास !!

हो ऐसा प्रयास बालक का हो
समुचित विकास!!
कच्चा घड़ा है मोड़ कर दे एक आकार!!

न बुझनें दे रार ऊंची बातें ऊंचे
संस्कार!
शिक्षा के साथ नैतिक मुल्यों से
करवायें परिचीत
हिम्मत परिश्रम धैर्य जज्बें देश भक्ति
बहादुरी व वीरता के
पढ़ायें पाठ!

आध्यात्मिकता का महत्व व उन मुल्यों से
पहचान करवायें
धर्म कर्तव्य की हो सबको जान!!

हम इस धरती पर आये हैं कुछ
ही दिन के हैं महेमान
वाकिफ हो इस बात से ताकि न अहम रहे
न अहंकार !!

शान्ति सुकून से रह कर करें उसके लिए
करें चिंतन
मनन और ध्यान!!

त्याग बलिदान की भावना से हो
जीवन यापन तभी
तो मिलेगा सम्मान !!!

गर्व के साथ हर्ष करें कि मनुष्य
अवतार पाया हैं
उसे सार्थक करें मुसीबतों से न करें
पलायन !
करें घडतर कुछ ऐसा की यह दुनियां
कितनी बुरी हो
लगे उसे मजेदार !!

स्वरचित :अशोक दोशी

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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