कवितासाहित्य

जीवन क्या है

चंद्रकला भगीरथी

जीवन ईश्वर का दिया वरदान।
जिसमें सांसो को डाला किया प्रदान।।

आन्त्रिक व बाहय इंद्रियों का भरपूर दिया ज्ञान।
शक्ति दी हे मानव स्वयं को पहचान।।

मन को थोड़ा चंचल थोड़ा शीतल कर।
ह्रदय में धडक के साथ भाव अंतस्थल।।

धर्म कर्म बुद्धी विवेक दिया।
नेत्रों में ज्योति का तेज दिया।।

धरती पर भेजा ममता की छाव में।
पिता की उंगली पकड़ चल कर्म राहों में।।

पर संसार की बाहय सुंदरता मोह देख।
मानव गर्भ की सब बातें भूला गलत राह देख।।

पुण्य कमाने की जगह वह।
जीवन भर पाप ही पाप कमाता।।

अन्त में मृत्यु को प्राप्त हो।
फिर कीड़े मकोडो की तरह जीवन जीता।।

ये ही है जीवन की व्याख्या परिभाषा।
इस मृत्यु जगत से छोड दे मोह का नाता।।

चन्द्रकला भागीरथी धामपुर जिला बिजनौर उतर प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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