कवितासाहित्य

डूबते किनारे

__सीताराम पवार


तुम्हारी खूबसूरती के नहीं हम तो सादगी के दीवाने हैं

अमावस की रात में कभी रोशन सितारे नहीं होते |

पतझड़ के रूखे मौसम में हसीन नजारे नहीं होते |

खुदा कसम गर हम तुमसे मोहब्बत नहीं करते तो

आज भी तुम हमको इतने हसीन और प्यारे नहीं होते |

तुमने नजर उठा कर भी नहीं देखा देखने वालों को

एक नजर देख लिया होता तो कितने ही इशारे होते |

आजकल जमाना तीखी नजरों को तीर समझता है

आज तुम्हारे तीखे तीरो के वार इतने भी करारे नहीं होते |

अभी नादान हो ना समझ हो जानते नहीं तीखी नजरों को

अभी-अभी लोंग पहनी है इसमें लश्कारे नहीं होते |

प्यार के समंदर में दिल की कश्तियां डूब जाती है

इस समंदर में लहरें होती हैं डूबते किनारे नहीं होते |

तुम्हारी खूबसूरती के नहीं हम तो सादगी के दीवाने हैं

आईने में अक्स से देख लिया होता फिर तुमने बाल संवारे नहीं होते|

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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