कवितासाहित्य

तनावग्रस्त

__नागेन्द्र नाथ गुप्ता, ठाणे (मुंबई)

मन में शांति चाहिए सभी को,
चित्त में शांति चाहिए सभी को।

उदिग्न मन हो जाता है अशांत,
कैसे करेंगे हम शीघ्र उसे शांत।

हमें शांत चित्त हो के तब बैठना,
मौन रहना है न अधिक बोलना।

हर इंसान को जरुरी है शांति
शांति लाएगी, जीवन में क्रांति।

ईर्ष्या द्वेष, बैरभाव करें हम दूर
फिर हम होंगे न इतने मजबूर।

अगर आ गई अपने मन में शांति
फिर रहे न चंचलता, न अशांति।

ध्यान करना, है सर्वोत्तम उपाय
फिर आदमी रहे न निरूपराय।

बैठे बंद कर के आंखें तनिक देर
मन को शांति मिलेगी देर- सबेर।

हम बने सरल, शांति के उपासक
चलो हम बने शांति के प्रचारक।

अधिकतर हैं तनावग्रस्त सारे लोग
मन में हो शांति तो भागे सारे रोग।


नागेन्द्र नाथ गुप्ता, ठाणे (मुंबई)

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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