कवितासाहित्य

तस्वीर बेनजीर बनाई

__सीताराम पवार


जो भी सोच को बनाने वाले की लेकिन तस्वीर बेनजीर बनाई है |

तस्वीर बनाने वाले ने यह कैसी तस्वीर बनाई है

चेहरा नहीं दिखाया उसने क्या आंखों में पीर बसाई है|

बना रहा था हाथी वह लेकिन हाथी बना नहीं पाया

बोझ उठाने वाली लड़की की मानो जिंदा तकदीर बनाई है|

मेहनत मजदूरी करना शायद लड़की की किस्मत में है

चेहरे पर कैसे भाव होंगे उसके हाथों में मेहनत की लकीर बनाई है|

मैले कुचेले कपड़े पहनाए हैं उसने भी इस लड़की को तस्वीर मे

गठरी सिर पर धरी हुई मानो गटरी कि उसने जागीर बनाई है |

बुझी बुझी आंखें होगी और उसकी बुझी आंखों में पानी है

पानी भरी आंखों में उसकी सपनों की ही जंजीर बनाई है |

दिन भर कड़ी मेहनत करके रातों में वह सो जाती है

मैं भी सोच रहा हूं इस लड़की की कैसी तासीर बनाई है |

तस्वीर तस्वीर है बनाने वाले का उसका अपना नजरिया है

जो भी सोच हो बनाने वाले की लेकिन तस्वीर बेनजीर बनाई है |

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
मध्य प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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