कवितासाहित्य

तुमसे मेरा रिश्ता ऐसा लगता है

__अनुराधा प्रियदर्शिनी

तुमसे मेरा रिश्ता ऐसा लगता है
जैसे जन्मों से पुराना नाता है
अब क्या-क्या बतलाऊँ तुमको
मुझसे ज्यादा तुमको मालूम है

मेरे दिल की धड़कन तुमसे है
हर इक साँस में नाम तुम्हारा है
कुछ भी सोचूँ उससे पहले ही
तुमने हरदम मुझको समझा है

जब भी सूरज भोर में निकले है
साँझ की बेला जब-जब आती है
हर पल हर घड़ी तुम ही संग में
गीत सरगम के होंठों पर आते हैं

अपने गुलशन में जब भी मैं देखूँ
हर एक सुमन में तुम ही दिखते हो
यहाँ प्रेम की खुशबू ऐसी फैली है
जीवन सहज सरल धारा बहती है

स्वरचित एवं मौलिक रचना

अनुराधा प्रियदर्शिनी
प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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