साहित्य

तुम बिनअब बिना जीना बेकार है

सरिता सिंह

तुमसे ही मेरी जिंदगी गुलजार है ।
तुम बिनअब बिना जीना बेकार है ।

तुमसे ही महका यह जीवन हार है।
नहीं बजे तुम बिन जीवन सितार है।

सूनी गलियां करती तेरा इंतजार है।
तुमसे ही सुहानी सावन की बौछार है।

तुमसे ही कभी प्यार और तकरार है ।
तुम हो साथ तो अच्छी लगे मनुहार है।

तुम बिन कहां पूरा साजन यह श्रृंगार है ।।
तेरा प्रेम अमृत कलश मेरा तारणतार है ।

जुदाई तुझ से , मेरे हाल की जिम्मेदार है ।
पुरानी यादें तेरी मेरे दिल पे करती वार है।

आजा लौट के परदेसी, आंखें बेकरार है।
तुझ बिन सूनी गलियां घर की सूने द्वार है।

सरिता सिंह गोरखपुर

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