साहित्य

तुम बोलो मेरे दोस्त, मैं कुछ नहीं बोलूंगा

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

तुम बोलो मेरे दोस्त, मैं कुछ नहीं बोलूंगा।
कहो जो कुछ कहना है, तुमको नहीं रोकूंगा।।
तुम बोलो मेरे दोस्त—————-।।

मुझको मालूम है कि तुम, आजाद हो मेरी तरहां।
तुम हकदार हो इसका, मैं तुमको नहीं टोकूँगा ।।
मुझको विश्वास है कि, तुम बनोगे नींव के पत्थर।
मगर कँगूरों की मानिंद, तुमको पसंद नहीं करूंगा।।
तुम बोलो मेरे दोस्त—————।।

मैं देख रहा हूँ , शायद तुम भी देख रहे हो।
इस देश से तुम्हारी गद्दारी, मैं सहन नहीं करूंगा।।
तुम्हारी तरहां ही सोचता हूँ ,नयी पीढ़ी को देखकर।
तुम बनोगे देश के रखवाले, उम्मीद यही करूँगा।।
तुम बोलो मेरे दोस्त—————।।

तुम्हारी तरहां जलती है , एक आग मेरे सीने में भी।
जला मत देना यह वादी, यह बदहाली देख नहीं सकूंगा।।
हो जाना कुर्बान तुम इस पर, तुम्हारी देशभक्ति यही है।
छोड़ देना इसके लिए स्वार्थ अपना, इंसान तुम्हें कहूँगा।।
तुम बोलो मेरे दोस्त————–।।

इंसाफ करना ईमान से, बहता है खूं इस माटी का तुम में।
चुकाना कर्ज इस धरती का, तुम्हारी दास्ताँ मैं लिखूंगा।।
बैठा हूँ तुम्हारी महफिल में, सुनने को तुम्हारा गीत।
गावो खुलकर मेरा भारत महान, मैं कुछ नहीं बोलूंगा।।
तुम बोलो मेरे दोस्त—————-।।

रचनाकार एवं लेखक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
मोबाईल नम्बर- 9571070847

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