कवितासाहित्य

तुम हमसे मिलने आये

__रूबी लक्ष्मी सिंह

आंखों में प्यार के सपने सजा,
तुम हमसे मिलने आए थे,
जब तुम्हें देखा पहली बार,
प्यार से मुस्काए थे,
झांका जब तुम्हारे दिल में,
सिर्फ हम ही समाये थे

मेरी हरी पीली चूड़ियां,
तेरे मन को भा गई,
घनी खुली जुल्फों ने
तेरे मन को भरमाया,
शरमाई झुकी पलकों ने,
तेरे मन को गुदगुदाया

मोहब्बत के जज्बातों ने,
दिल में शोर मचाई थी,
बेकरारी हुई थी कम,
जब तुम्हारे करीब आई थी,
कभी ना छूटे साथ,
धड़कन ने ऐसी आवाज लगाई थी,

फिर तुम्हारे दिल में आकर,
हमने तुम्हें अपना बनाया,
तुम्हारे हाथों में हाथ देकर,
अपना सपना सजाया,
कभी हम मोतियों सा न बिखरे
ऐसा बंधन बांध लिया हमने,

मेरा छुईमुई सा शरमाना देख,
मेरे करीब आना,
रिमझिम बारिश में,
हाथों में हाथ लेकर
कदम से कदम मिला टहलना,
सुखद अहसास था

पाकर साथ तुम्हारा,
जीवन धन्य हुआ हमारा,
अपने हाथों में मेहंदी रचा,
तेरी दुल्हन बन गई,
सात फेरों के वादों संग,
जन्मो जन्म के बंधन में बंध गई


रूबी लक्ष्मी सिंह
जमशेदपुर झारखंड

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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