कवितासाहित्य

तुम हो तो मैं हूँ

_अनुराधा प्रियदर्शिनी

गहन तिमिर के अंधियारे में एक उजाला केवल तुम हो
पतझड़ के मौसम में भी खुशियों का बसंत ले आते हो
निराशा के बादल जब घिर आते प्रेम की छाँव लाते हो
नैना जब सूनेपन में खोए रहते नैनों में चमक लाते हो

दुनिया के इस भीड़ -भाड़ में एक विश्वास तुम्ही तो हो
जब भी कोई चोट लगी है तुम मरहम लगाने आते हो
मेरे आँखो के हर अश्रु को मोती सा सम्हाला करते हो
मेरे बढ़ते कदमों के संग परछाईं बन साथ हमेशा हो

चिलचिलाती धूप में तुम बारिश की बहार ले आते हो
घनघोर अंधेरी रातों में दीपक का उजाला ले आते हो
ख़ामोश लबों की बातें तुम हरदम ही समझ जाते हो
मेरे साँसों की हर धड़कन में केवल तुम ही रहते हो

     अनुराधा प्रियदर्शिनी
     प्रयागराज उत्तर प्रदेश
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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