साहित्य

तू हिसाब न रख

सुखमिला अग्रवाल,‘भूमिजा’

जीवन के शेष सफर में,
पडाव सैंकडों आतें हैं,
धूप छांव से घिरे हुए,
रस्ते सर्पिले होते हैं।

रास्ते सर्पिले आते हैं……

टेढ़ी-मेढ़ी पथ पगडंडी,
होंगे तूफानों से वास्ते,
घेरेंगी मजबूर आंधियाँ,
घोर निराशा पनपेगी।

घोर निराशा पनपेगी…

कभी मिलेंगी तनहाइयाँ,
चलना सम्भल सम्भल कर,
मन को मन का संबल देकर,
बढ़ते जाना आठों पहर।

बढ़ना जाना आठों पहर…

गम ना कर बस बढता जा रे,
जीवन तो इसी का नाम रे,
एडवेंचर सा जी ले इसको,
कभी ना लेना तू विश्राम रे।

कभी न लेना तू विश्राम रे…

होगा सफल सफर जीवन का..
कर्म पथ पर बढता जा,
बैरागी सा जीवन जी ले,
जो कुछ पाया लौटाये जा।

जो कुछ पाया लौटाये जा…

औरों पर खुशियाँ लुटाये
जा…

सुखमिला अग्रवाल,‘भूमिजा’
©स्वरचित मौलिक
जयपुर राजस्थान

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One Comment

  1. सुख मिला जी, बहुत ही उम्दा हार्दिक बधाई. अभिनंदन 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷
    अध्यक्ष महात्मा गांधी साहित्य मंच गांधीनगर Mo 8849794377

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