कवितासाहित्य

तेरा यूं छुप छुप कर मुझे देखना,

__✍सुमित मानधना ‘गौरव’ सूरत।

तेरा यूं छुप छुप कर मुझे देखना,
तेरा यूं बिन बात के ही मुस्कुराना,
सच में मुझे बहुत अच्छा लगता है।

तेरा यु शर्मा के पलके झुका लेना,
उंगली पर अपने दुपट्टे को लपेटना,
सच में मुझे बहुत अच्छा लगता है।

तेरा यूं प्यार से मुझे ही निहारना,
टकटकी लगाए एक टक देखना,
सच में मुझे बहुत अच्छा लगता है।

तेरा यूं मेरे इतने ज्यादा करीब आना,
सांसों का सांसों से आपस में टकराना सच में मुझे बहुत अच्छा लगता है।

मेरा यूं तेरी कोमल बांह को पकड़ना
कसकर तुझे अपने सीने से लगाना, सच में मुझे बहुत अच्छा लगता है।


✍सुमित मानधना ‘गौरव’ सूरत।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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