कवितासाहित्य

दर्द

होती तो है बहुत नाजुक सी पर हर दर्द से लग जाता है लड़कियां,
लगती तो है बहुत कमजोर सी पर हर काम कर जाती है लड़कियां,

होती तो है पापा की परी पर जरूरत पड़ने पर सारे किरदार निभा जाति हैं लड़कियां,
अपनी मुस्कुराहट से पूरे घर को चहका देती है लड़कियां,

आॉच आए अगर परिवार पर तो सारी मुसीबतों से लड़ जाती है लड़कियां,
रहती है चुपचाप हमेशा पर जरूरत पड़ने पर हर रूप दिखा जाती हैं लड़कियां,

सह जाती है हर दर्द चुपचाप अपनों के लिए,
बात स्वाभिमान की आए तो दुनिया हिला देती है लड़कियां,

वैसे तो हर कोई समझता है कमजोर इन्हें,
पर छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा काम कर जाती है लड़कियां,

लड़कियों वाले तो सारे काम कर ही लेती है वह पर,
लड़कों वाले भी सारे काम कर जाती है लड़कियां,

छोटी-छोटी जिम्मेदारियों को लेकर भी परेशान हो जाते हैं लोग,
वहां बड़ी बड़ी और एक साथ दो दो घर की जिम्मेदारियां संभालती है लड़कियां,

कभी बहू बेटी बहन तो पत्नी तो कभी माॉ बन कर
एक इंसान होकर सारे किरदार निभा जाती है लड़कियां,

जिसके भाग्य अच्छे हो उनके घर जन्म होता है लड़कों का,
पर जिनके सौभाग्य अच्छे होते हैं उनके घर जन्म लेती हैं लड़कियां.

-Shivani M.R.joshi

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!