साहित्य

दशमेश पिता गुरु गोबिन्द सिंह

मनजीत कौर

वार दिया हो पिता. ऐसा पुत्र न कहीं इतिहास में
वार दिये हों पुत्र, ऐसा पिता न कहीं इतिहास में
धर्म की खातिर वार दिए चार फूल अपनी बगिया के
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

दशमेश पिता जन्में पटना शहर में, बने प्रेरक पिता के त्याग के
नूरे इलाही, गरीब निवाज़, मुसीबत से न कभी डरे वे
रूप अति मनभावन, कलगी पगडी पर शोभे, बाज सजाये हाथ में
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

गुणों से संत महात्मा, कर्मों से निर्भीक योद्धा थे वे
जात पाँत न जाना कभी, छोटा बडा न माना कभी
सरसा नदी के तट पर बिछुडे वे अपने परिवार से
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

चमकौर युद्ध में दी शहादत, अजीत और जुझार ने
छुडाए छक्के दुश्मन के, इन वीर जवानों ने, थे शेर वे ,
गीदडों से कैसे डरते वे, लडे ज़ालिमों से, था अनोखा संग्राम ये
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

न देखा, न सुना ऐसा जहान में, रब का न जाने कैसा रंग ये
नन्हें फतेह और ज़ोरावर चुनवाये गए दीवार में, धर्म से न डिगे वे
धमकियाँ लालच भी न डरा सकी नन्हें बालों को
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

सवा लाख से एक लडाऊँ तबै गोबिन्द सिंग नाम कहाऊँ
भिड गए समन्दर सी सेना से, गोबिन्द सिंग कुछ सैनिको संग
तलवार उठाई सदैव महावीर ने, गरीबों की रक्षा, विरुद्ध अन्याय के
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

किया मुकम्मल गुरु ग्रंथ साहिब, इस दार्शनिक संत ने
मुहर लगाई गुरु मान्यो ग्रंथ पर, कौम के इस रहबर ने
गुरबाणी को माना गुरु, जिसपर चल, बना्ना है जीवन सफल हमको
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

पंथ के महान ज्ञानी ने, की सर्जना खालसा पंथ की
दिया सिक्खों को विशिष्ट, सुन्दर रुप और पहचान भी
थे वे ऐसे अकेले गुरु जिसने शिष्यों को कराया अमृत पान
फिर खुद किया शिष्यों द्वारा अमृत पान, ऐसी कोई मिसाल न जगत में
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

विश्व भर में डंका बजाती मानव सेवा का, सिख कौम है आज
दुनिया में उसका न कोई सानी है आज,
वारा पिता, पुत्र, स्वयं को, दिया नारा ‘’बोले सोनिहाल-सतश्रीअकाल’’
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

तलवार की तीखी धार है सिक्खी, न कॊई आसां काम ये कोई
दिया नाम पुरुषों को सिंग और कौर नारियों को
सिंह सिंहनियाँ हैं सब, न छेडे उनकी आन को कोई
न खेले उनकी आन से कोई, न खेले उनकी आन से कोई
वाह वाह गोबिन्द सिंग, आपे गुरु चेला, आपे गुरु चेला

मनजीत कौर
हुबली & कर्नाटक

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