साहित्य

दशहरा

गीता पांडेय अपराजिता

नवरात्रि पूरी हुई, पर्व दशहरा आज।
शरद भव्य है लग रही, करें दिलों पर राज।।

दशमी तिथि को क्वार में, मने दशहरा पर्व।
शुक्ल पक्ष में राम की , हुई विजय थी गर्व।।

दस मुख था दस शीश भी, दिया राम ने मार।
पर्व दशहरा में करो, सारे दूर विकार।।

पर्व दशहरा आ गया ,करें बुराई नाश।
मन के रावण को जला ,तब हो अहम हताश ।।

महल दशानन का ढहा, रघुनंदन की जीत।
पर्व दशहरा ने रचा ,खुशियों के नव गीत।।

पर्व दशहरा दे रहा , हमको यह संदेश।
नाथ सकल कुल का करे , अहंकार और क्लेश।।

मन का रावण नहि मरा , करें अटपटे काम।
मना दशहरा हम रहे , वर्षों से अविराम।।

करें दशहरा में सभी, चलो बुराई भस्म।
पर्व निभाने मात्र की, नहीं बने यह रस्म ।।

सच्चाई के सामने , झूठ हुआ भयभीत।
मना दशहरा सब रहे , मिली राम को जीत।।

सदा विजय हो सत्य की ,यही दशहरा पर्व ।
मिटा ह्रदय दुष्वृत्तियांँ, करना फिर है गर्व।।

सोच सदा बदलाव हो , करो बुराई अंत।
विजयदशमी पर्व बढ़े, महिमा रहे अनंत।।

गीता पांडेय अपराजिता

रायबरेली उत्तर प्रदेश

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