कवितासाहित्य

दिल – ए – हाल कोई सुनाता है!!

भीगना चाहता है अश्क में वो ये तो बतलाता है मुझे,
किया किसने इतना परेशाँ वो भी छिपाता है ,

गम – ए – शहर में बीत रहे है दिन कैसे उसके?
वो आशिक़ हमसे आजकल ये भी छिपाता है ,

वो क़ाबिल है हम जानते है उसको,
फ़िर भी नाक़ाबिल सर – ए – राह बतलाता है,

हमसे पूछ कर अपने ही बारे,
वो हमको नादानियों के किस्से सुनाता है,

हम रोज़ – रोज़ कहाँ मिल पाते हैं उससे,
हमको घर एक ही दिन बुलाया करता है,

हमसे नाराज़ हो चले है चिराग़ सारे,
रौशनी को रौशनी में जो वो जलाता है,

आज रुस्वा है चमन हमारे आँगन के हमसे,
वो मेहबूब हमारा स्वागत जो नहीं कर पाता है,

कहे किस से फ़साने इस दिल के,
इस दिल में जो उतरता है वो फ़िर नहीं उतर पाता है,

वो ज़ुबाँ से कहते हुए ठिठरता है,
इश्क़ करता है मगर जताते हुए डरता है,

करे कोई हमसे भी नादानी कभी – कभी,
मेरा मेहबूब ये सोच – सोच कर आँखें मलता है,

फनाह होते है मुहब्बत के किस्से मुहब्बत में कई,
मुहब्बत में दिल – ए – हाल कोई सुनाता है!

मीरा पिंकी मिश्रा

50% LikesVS
50% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!