साहित्य

दिवाली आई

साधना

अंतर तम में दीप जलाओ
आज दिवाली आई
शुभता की उजास फैलाओ
खुशी दिवाली लाई ।

वनवास राम का पूर्ण हुआ
सुखद शुभ घड़ी आई
अयोध्या की सूनी आंखों में
आस दरस की छाई
फूल सुगंधि पराग लुटाओ
संदेश पवन लाई
शुभता की उजास फैलाओ
आज दिवाली आई…

जनकसुता के कोमल पगतल
आज पड़ें फूलों पर
सूरज को भी मात दे रही
यूं बेंदी माथे पर
अधरों पर रह रह खिल जाती
मुस्कान मधुर छाई
शुभता की उजास फैलाओ….

सकुशल वापसी निज राज्य में
लखन लला तुष्ट हुए
छवि उर्मिल की कौंधी मन में
मन प्रेम वश विह्वल हुए
प्रतीक्षा भरत की सफल हुई
मातृ आशीष पाई
शुभता की उजास फैलाओ….

पूनम सा कर डाला उजला
अमावस की रात को
भूल गया है हर कोई अब
उदासी की बात को
दीपों की हीरक जगमग में
मन ने खुशियां पाई
शुभता की उजास फैलाओ
खुशी दिवाली लाई…

साधना
दिल्ली

स्वरचित, मौलिक, और अप्रकाशित रचना

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