साहित्य

दीपावली


तरसेम शर्मा

दीप पर्व है, प्रकाश का।
तम से उजियारे का।।

दीप पर्व है, सत्य का।
अनेकता में एकता का।।

दीप पर्व है, भावनाओं का।
उगलते जहनुम में प्यार के प्रतीक का।।

दीप आधार है,हार का।
बाहुल्यता में समानता का।।

दीप बाध्य नहीं है, स्थान का। अंधकार में रोशनी का।।

दीप पर्व है, सौंदर्य का।
विषक्तता में अमृत का।।

दीप कटिबद्ध है, अंधकारों में।वात्सल्यता के गलियारों में।।
दीप पर्व है, प्रकाश का।
तम से उजियारे का ।।

स्व:रचित/अप्रकाशित/मौलिक रचना

      तरसेम शर्मा                                   
   कैथल हरियाणा
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