साहित्य

दीपावली

डाॅ मनोरमा शर्मा

जगमग जगमग दीप जलाएं
अन्तर्मन का तिमिर मिटाएं
इस प्रकाश के अतुल पर्व से
आलोकित जीवन अपनाएं अन्तर्मन का तिमिर मिटाएं ।

चंचल मन का दूर करें भ्रम परोपकार के भाव हों मुखरित
निःस्वार्थ सेवा के बल से ही
जन-जन का मस्तक हो उन्नत
खुशियों का हो पल विस्तारित
ऐसा वातावरण बनाएं
अन्तर्मन का तिमिर मिटाएं ।

जीवन में रखें सर्वोच्च लक्ष्य
वसुधैव कुटुम्बकम् सम जग
जाने
नव प्रकाश की अगनित किरणें
अम्बर से धरती पर छाएं
जगमग जीवन को कर जाएं
अन्तर्मन का तिमिर मिटाएं ।

पावन संदेश दीपावली पर्व के, धर-घर तक ले जाएं
मर्यादा पुरुषोत्तम राम कथा को,जीवन में अपना कर अपना जीवन सफल बनाएं
अन्तर्मन का तिमिर मिटाएं ।
जगमग जगमग दीप जलाएं
अन्तर्मन का तिमिर मिटाएं ।

सम्मान हेतु पेषित रचना “दीपावली” शीर्षक से मेरी स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है ।

डाॅ मनोरमा शर्मा , शिमला
हिमाचल प्रदेश

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