साहित्य

दीपावली

डा0 प्रमोद शर्मा

जलाओ दिए आज हर्षित है मन
बड़ी मीठी मीठी …चली है पवन|

न नफरत न जुल्मों का संसार हो
हाँ सर्वत्र बस… प्यार ही प्यार हो

है शुभ दीपा-वली कर… ले हवन
जलाओ दिए आज हर्षित है मन

श्री राम जी जैसा. …व्यवहार हो
ना बाकी कहीं भी ़अनाचार हो

आँसू से भीगे ना…….कोई नयन
जलाओ दिए आज हर्षित है मन

बहन बेटियों का सब आदर करें
ना माता-पिता का .. निरादर करें

यही स्वर्ग है छू..लो इनके चरण
जलाओ दिए आज हर्षित है मन

छुटें फुलझड़ी औरबम व पटाखे
हो घर घर मिठाई खील ..बताशे

सभी राम सीता.. के गाए भजन
जलाओ दिए आज हर्षित है मन

कहीं भी न बाकी रहे अब अंधेरा
हर घर खुशी लाए अब हर सवेरा

रहे प्रेम रोशन …जमी और गगन
जलाओ दिए आज हर्षित है मन

स्वरचित मौलिक व अप्रकाशित रचना
डा0 प्रमोद शर्मा प्रेम नजीबाबाद
बिजनौर

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