साहित्य

दीपों का त्योहार

आरती तिवारी सनत


दिवाली दीयों का है त्यौहार..
भारत की परंपरा संस्कृति..
सनातनी युग से चली आई है..
अवध में राम वनवास से लौटे..
घर घर खुशियां मंगल छाई..
नगर ग्राम वासी मंगल दीप जलाएं..
मिट्टी के दीयों से रोशन हुआ..
आज घर आंगन अपना..
बाग बगीचे खेत खलिहानों..
सुहागिनी मंगल दीप जलातीं..
लक्ष्मी गणेश की पूजा-अर्चना..
खील बताशा धान की लाई चढ़ाते..
फल फूल श्रीफल केला अमरूद मौसमी फल…
मिट्टी के दीयों से रोशन…
खुशियां छाई है अपार..
मोदक लड्डू भोग लगाएं..
मिष्ठान पूरी और पकवान…
आंगन में रंगोली सजातीं..
पारंपरिक अल्पना से सजता द्वार..
दिवाली दिनों का है त्योहार..
मिट्टी के दिए से पूरा घर आंगन सजाएं…
मिट्टी के दीयों से मनाया जाता है..
दीपावली का यह अद्भुत त्यौहार..
भेदभाव सब भूल जाते हैं..
दीयों की रोशनी में सब प्यार बांटते..
मानव मन का तिमिर मिटे..
यही इस त्यौहार का है संदेश…
दीयों का यह त्यौहार…
भारत की परंपराओं का है मान..
दीयों का त्यौहार मनाएं..
हम सब मिलकर खुशियां मनाएं..
सुख समृद्धि स्वास्थ्य दीर्घायु..
माता-पिता बड़ों का आशीष..
परिवार की हंसी खुशी..
यही दीयों का है संदेश…
दिवाली दीयों का है त्योहार..!!

आरती तिवारी सनत
©® दिल्ली

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!