साहित्य

दीप रखें उस देहरी पर

मीना जैन

चलो, दीप रखें उस देहरी पर
जहाँ हर निशा अंधियारी है
महामारी ने छीनी खुशियाँ
माता-बहन-बधू दुखियारी हैं!

चलो, बाँटें उपहार उस बालक को
कोरोना ने छीना पालनहारे को
जिसका चला गया रोजगार
भूल न जाएं कहीं उस द्वारे को!

मिट जाए मन का अंधियारा
फैले सद्भाव की जगमग ज्योति
वैमनस्य को मन से दूर कर
चमके शुभ्र विचारों के मोती!

दीपोत्सव सामाजिक उत्सव है
समाज-राष्ट्र का हो उत्थान
उज्ज्वल धवल हो हर कोना
हर कोई दे समुचित योगदान!

दीपमालिका सजाओ शुचिता से
घर-घर पहुंचे प्रकाश किरण
निखर जाए प्रकृति का रूप
परिष्कृत हो अपना पर्यावरण।

स्वरचित, अप्रकाशित रचना।
✍️मीना जैन
गाजियाबाद।

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