साहित्य

दीवाली

दीवाली आई
रौशनी का त्यौहार
सौगातें लाई ।

साफ-सफाई
घर-आंगन स्वच्छ
प्रीत सजाई ।

अक्षत रोली
द्वार सजे रंगोली
आई दीवाली ।

माटी देश की
हर्ष उल्लास भरें
दिये बनाती ।

दीप रौशन
करें मन मंदिर
लक्ष्मी पूजन ।

बताशा लाई
प्रसाद मीठा चढ़े
भोग लगाई ।

शुभ-लाभ हो
खुशहाल आप हो
सजे मन हो ।

दीप का प्रण
उजियारा फैलाना
हैं दीपोत्सव ।

फटाके नहीं
प्रदूषण से बचें
जोखिम नहीं ।।

स्वरचित/मौलिक/अप्रकाशित
योगिता चौरसिया “प्रेमा”
मंडला म.प्र.

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