कवितासाहित्य

दूर रहेगी अब बला हमसे

__सीताराम पवार


“तुम्हारा दिल ही ठिकाना है इसे छोड़कर कहां जाएंगे”

शिकवा भी रहे हमसे और गिला भी रहे हमसे

दिल की आरजू है दिल से दिल मिला रहे हमसे।

फासले हो दरमियां या फिर खता हो भी गई कोई

रब से दुआ है जो था वही सिलसिला रहे हमसे।

अगर याद आए तो याद फिर कर लिया करो हमको

यादों के गुलशन मे दिल का फूल खिला रहे हमसे।

तुम्हारे हसीन प्यार में अपने आपको भूल गए हम भी

इस दीवानगी में दुश्मनों का दिल जला रहे हमसे।

तुम्हारा दिल ही ठिकाना है इसे छोड़कर कहां जाएंगे

दिली तमन्ना है इस दिल का दरवाजा भी खुला रहे हमसे।

तुम्हारे हसीन प्यार में कितनी ही खताए की होगी मैंने

मेरी इन खताओं को तुम्हारा यह दिल भी भुला रहे हमसे।

मेरी दुआ है तुम्हें जिंदगी में कभी गम ना मिले

तुम्हारी रोशन दुआओं से दूर रहेगी अब बला हमसे।

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
मध्य प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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