साहित्य

देवी गीत

सतरंगी ओढ़े हो मातु चुनरिया।
शेर सवार हो आई मेरी मइया।

अनुपम आभा बड़ी लगती निराली,
मुखड़े पर छाई है स्वर्णिम लाली।
लंबे दिखे केश बड़ी-बड़ी अखियांँ,
शेर सवार हो आई मेरी मइया ।

हरी हरी चूड़ियांँ मेहंदी रचाई,
घनी घनी पलके सुंदर सी कलाई।
रुनझुन रुनझुन बाजे रे पैजनिया ,
शेर सवार हो आई मेरी मइया।

लिखती हैं सबकी किस्मत की रेखा,
इनके जैसी दयालु नाहीं देखा।
गीता भी आई मांँ तोहरे दुअरिया,
शेर सवार हो आई मेरी मइया ।

जो कोई तुमको जग में है ध्याता,
सदा भवसागर से पार हो जाता।
दर्शन दे दो आज खोलि केवँरिया ,
शेर सवार हो आई मेरी मइया ।

स्वरचित व मौलिक
गीता पांडे अपराजिता रायबरेली उत्तर प्रदेश

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!