साहित्य

“देवी गीत”

द्वारे आए खप्परवाली,
लेकर झोली खाली।
करदे हमें भी कुछ मेहरें,
जग की मेहरां वाली।।

कोई पुकारे आदि भवानी,
कोई शेरा वाली।
कोई शारदे माता कहता ,
कोई कहता काली।
कोई कहे पहाडा वाली।
लेकर झोली खाली।
द्वारे आए खप्परवाली,
लेकर झोली खाली।।

जो भी तेरे द्वारे आता,
मन वाँक्षित फल पाता।
दीन दुखी की बन जाती मां,
तू ही भाग्यविधाता।
देती सबको तू खुशहाली।
लेकर झोली खाली।
द्वारे आए खप्परवाली,
लेकर झोली खाली।

दासी बन कर आज अंबिका,
द्वारे तेरे आई।
हे जग जननी पार लगादे, तुझसे आश लगाई।
मां तू जग में सबसे आली।
लेकर झोली खाली।
द्वारे आए खप्परवाली,
लेकर झोली खाली।।”

   अंबिका झा ✍️
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