साहित्य

दोहे अमित के

कबिरा जग को कह गए,गुरु से बड़ा न कोय।
मात-पिता यदि ना रहें,जन्म कहाँ से होय।

वरदानी माता-पिता,पग-पग होत सहाय।
गुरु पद पंकज शीश जो,आगू बढ़ता जाय।।

भाई है बल बाँह का,बहना है सौभाग्य।
जो मूरख समझे नहीं,है उनका दुर्भाग्य।।

विपदाएँ किसको नहीं,करती हैं भयभीत।
जो भय पर भारी पड़े,होती उसकी जीत।।

कवि निज अंतर रख व्यथा,बाँटे जग को प्यार।
फटेहाल खुशहाल वह , बैठा हर उर द्वार।।


■अमित शिवकुमार दुबे
एस्टर,बाफना मिडोस,पालघर
8007619524

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!