साहित्य

दो-दो हिन्दुस्तान

_सत्यवान ‘सौरभ’
रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट

लाज तिरंगे की रहे, बस इतना अरमान ।
मरते दम तक मैं रखूँ, दिल में हिन्दुस्तान ।।

बच पाए कैसे भला, अपना हिन्दुस्तान ।
बेच रहे हैं खेत को, आये रोज किसान ।।

आधा भूखा है मरे, आधा ले पकवान ।
एक देश में देखिये, दो-दो हिन्दुस्तान ।।

सरहद पर जांबाज़ जब, जागे सारी रात ।
सो पाते हम चैन से, रह अपनों के साथ ।।

हम भारत के वीर हैं, एक हमारा राग ।
नफरत गैरत से हमें, जायज से अनुराग ।।

खा इसका, गाये उसे, ये कैसे इंसान ।
रहते भारत में मगर, अंदर पाकिस्तान ।।

भारत माता रो रही, लिए हृदय में पीर ।
पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से वीर ।।

भारत माता के रहा, मन में यही मलाल ।
लाल बहादुर-सा नहीं, जन्मा फिर से लाल ।।

मैंने उनको भेंट की, दिवाली और ईद ।
जान देश के नाम जो, करके हुए शहीद ।।

घोटालों के घाट पर, नेता करे किलोल ।
लिए तिरंगा हाथ में, कुर्सी की जय बोल ।।

आओ मेरे साथियों, कर लें उनका ध्यान ।
शान देश की जो बनें, देकर अपनी जान ।।

(सत्यवान ‘सौरभ’ के चर्चित दोहा संग्रह ‘तितली है खामोश’ से। )

सत्यवान ‘सौरभ’
रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,

50% LikesVS
50% Dislikes

कुमार संदीप

अध्यापक सह लेखक । निवास स्थान- सिमरा(मुजफ्फरपुर) बिहार । विभिन्न साहित्यक पत्र पत्रिकाओं में निरंतर रचना प्रकाशन । कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित । वर्तमान में ग्रामीण परिवेश में अध्यापन कार्य सहित दि ग्राम टुडे मासिक व साप्ताहिक ई पत्रिका के अलंकरण का कार्य।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!