साहित्य

द्वारे पर आई गऊ मैया

द्वारे पर आई गऊ मैया।
हाथ फेरे है कृष्ण कन्हैया।।

बछड़ा निहारे श्री भगवन को।
गोपाला धान खिलाये गऊअन को।।
गोपी संग राधा भी आई।
लेकर धान खिलाने गऊअन को।।
धुन में खड़े सृष्टि रचैया।
द्वारे पर आई गऊ मैया।।
हाथ फेरे है कृष्ण कन्हैया।

तैंतीस कोटी देवता बदन में।
श्री हरि सोचे जहन में।।
जिस घर गऊ पालन हो।
स्वर्ग लगे वो रहन में।।
प्यार से कहते बंशी बजैया।
द्वारे पर आई गऊ मैया।।
हाथ फेरे है कृष्ण कन्हैया।

अमृत धार इसके थन में।
पिये रोग मिटे बदन में।।
गौ मूत्र भी बहुत गुणकारी।
सुख शांति लावे चमन में।।
गोबर से लक्ष्मी आवे भैया।
द्वारे पर आई गऊ मैया। ।
हाथ फेरे है कृष्ण कन्हैया।

इसका पूजन कर तिलक लगाओ।
गाय मारो न काटो सताओ।।
भव सागर से यही तारे।
इसे रोज एक रोटी खिलाओ।।
जहरीला गीत गाने बनके गवैया।
द्वारे पर आई गऊ मैया।।
हाथ फेरे है कृष्ण कन्हैया।

सर्वाधिकार सुरक्षित-

डॉ.गोरथनसिंह सोढा ‘जहरीला’
बाड़मेर राजस्थान

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