साहित्य

धोबिन के पास

दुपहर में राम की माँ ज़ोर से चिल्लाती हुई बाहर आती है। किसी ने मेरे रामु को देखा सुबह से घर नहीं आया। ज़ोर ज़ोर से सबके गेट बजाते हुये पूछती है?तभी खेत की तरफ से आते हीरालाल बोलते है धोबिन के पास खड़े थे। ये बात मुखिया जी जैसे ही सुनते है पंचायत भवन से पंचायत बोला लेते है। सब लोग राम की माँ को बुरा भला कहने लगते है।मुखिया जी सबको शान्त करते हुऐ राम की माँ को बोलते है, देखो एक तो धोबिन का पति घर पर नहीं है ऐसे में हम सबका फ़र्ज़ होता है उसकी रक्षा करना तभी राम आ जाता है लकड़ियो से बंधा गठ्ठा ले कर आते है। जैसे ही राम को देख कर सब लोग उस पर टूट पढ़ते है कुछ लात तो कुछ घुसे मारते है,मुखिया जी अपनी कुर्सी से उठ कर आते है लड़ाई शांत करते है। मुखिया जी राम से पूछते है तुम धोबिन के घर में क्यों गये थे।यह सुन राम के होश उड़ जाते है। दो मिनट शान्त हो कर फ़िर से सवाल करते है मुखिया जी यह सुनकर राम बोलता है आपको किसने बोला में धोबिन के घर गया। यह सुन सब बोलते है हीरालाल तब राम बोलता हीरालाल को बुलाओ? हीरालाल को आते देख राम उसकी कॉलर पकड़ कर पूछता है क्यों मेरी इज्ज़त की धज्जियां उड़ा रहे हो कब गया में धोबिन के घर तब मुखिया जी बोलते आराम से लड़ाई नहीं तब हीरालाल बोलता हिमने तो ये बोला धोबिन के पास खड़े लकड़ी काट रहे है ये नहीं बोला धोबिन के घर गये थे।
(धोबिन बुंदेलखंड में शीशम के पेड़ को बोलते है)

प्रतिभा जैन
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश

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