लघु कथासाहित्य

नई बहु

__सुधा तिवारी

सुबह तड़के ही उठ गई थीं मिसराइन , पाँव जमीन पर नही पड़ रहे थे उनके आज उनकी नई
बहु जो प्रवेश कर रही थी घर में ।
बहु के इन्तजार में पलकें बिछाऐ मिसराइन यही सोच रही थीं कि आज मेरी बरसों की मुराद पूरी हो जाऐगी आज बहु के रुप में मुझे बेटी मिल जाऐगी जिसे मैं जान से ज्यादा प्यार दूंगी ।
मिसराइन के बस दो बेटे ही थे
पर बेटी की कमी उनको हमेशा खलती थी जिसे वो बहु से पूरा करना चाहती थीं ।
बेटा और बहु जैसे ही दरवाजे पर पधारे मिसराइन ने उनकी आरती उतारी और अपनी बहु को गले से लगा लिया । मेरी प्यारी बहु आज इस कलेजे को ठन्ढक मिल गई इतना कहते ही उनकी आँखें भर आयीं ।
सौम्या ( उनकी बहु ) जो सास के नाम से डरी हुई थी इतनी प्यारी सास को पाकर धन्य हो गई
और भगवान का धन्यवाद करने लगी इतना प्यारा ससुराल देने के लिऐ ।
तभी मिसराइन की चचेरी ननद बोल पडी़ क्या भाभी अभी से क्यूँ बहु को सर पे चढा़ रही हो
दो चार दिन बीतने तो दो फिर उसके असली रंग ढंग सामने आने लगेंगे तब चढा़ना सर पे ।
नही जीजी मेरी बहु ऐसी नहीं है ये तो बहुत प्यारी है , अरे जाओ सारी बहुऐं शुरू शुरू में प्यारी ही होती हैं फिर धीरे धीरे अपने असली रूप में आ जाती हैं ।
इतना सुनकर मिसराइन के मन में बहु को लेकर शक बैठ गया और उनकी बहु का मन भी खट्टा हो गया ।
माँ बेटी का एक पवित्र रिश्ता जो प्यार से पनपने वाला था लोगों की बातों में आकर पहले ही सूख गया
क्या लोगों की बातें हमारे जीवन में इतना मायने रखती हैं कि हम अपने सुंदर रिश्तों को शक की नजर से देखने लगें ।

सुधा तिवारी
देवरिया उ०प्र०

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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