साहित्य

नए साल के स्वागत में मुशायरे का आयोजन

दि ग्राम टुडे

शिवम झा जी की संस्था स्क्वायड टैलेंट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और राब्ता पोएट्री “तेरे मेरे एहसास” के बैनर तले प्रत्येक रविवार कराए जा रहे शो “बज़्म-ए-मुशायरा” में नए साल के स्वागत में बहुत ही शानदार मुशायरे का आयोजन हुआ, जिसकी प्रबंधक शुभ्रा पालीवाल जी रहीं। इस मुशायरे में देश के सुप्रसिद्ध ग़ज़लकारों व गीतकारों ने शिरकत की।

इस मुशायरे की शुरुआत संस्था के संस्थापक शिवम झा जी के द्वारा हुई तथा इसका संचालन जानी-मानी शायरा सोनम सोनिया अक्स जी के द्वारा किया गया। मुशायरे की अध्यक्षता ममता किरण जी ने की और इस में विशिष्ट अतिथि के रूप में पंकज गर्ग जी, डॉक्टर चेतन आनंद जी और रीना झा शर्मा जी ने शिरकत की।

कार्यक्रम लगभग 2 घंटे तक चला। जिसने सबसे पहले पंकज गर्ग जी ने अपनी ग़ज़लों से समा बांध दिया। और फिर यह सिलसिला लगातार चेतन आनंद जी, रीना झा जी, सोनिया अक्स जी और ममता किरण जी के साथ परवान चढ़ता गया।

विशिष्ट अतिथि श्री पंकज गर्ग जी (रुड़की, उत्तराखंड) की इन पंक्तियां ने खूब वाहवाही लूटी:

दोस्तों को ढूँढता हूँ दुश्मनों के शहर में,
रोशनी मिलती कहाँ है, ज़ुल्मतों के शहर में।

एक ढूँढा सौ तरीक़े जान देने के मिले,
किस क़दर आसानियाँ हैं मुश्किलों के शहर में।

विशिष्ट अतिथि डॉ० चेतन आनंद जी (गाजियाबाद) ने जब अपना काव्य पाठ किया तो सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। उनकी पंक्तियां:

याद आते हैं हमें जब चंद चेहरे देरतक।
हम उतर जाते हैं गहरे और गहरे देरतक।

आमंत्रित कवियत्री रीना झा जी (दिल्ली) ने अपने गीत और गजल से खूब रंग भरा। उनकी पंक्तियां:

रूह का जिस्म में बसर ही तो है,
ज़िंदगी क्या है? चंद सांसों का सफर ही तो है…

दिल के समंदर में यादों की लहर तेज़ सही,
ये भी थम जाएगी इक दिन यूं ही, लहर ही तो है…

मुशायरा की संचालिका और जानी मानी गजलकारा सोनिया सोनम अक्स जी (हरियाणा) की इन पंक्तियां पंक्तियों को खूब सराहा गया:

जब नये पल हाथ आये तो पुराने खो गये
भीड़ में लम्हों की सदियों के खजाने खो गये

खो गई नानी की लोरी खो गए दादी के गीत
गर्मियों की छुट्टियों के सब बहाने खो गये

अंत में अध्यक्षा ममता किरण जी (कानपुर) ने मुशायरे की शाम में चार चांद लगा दिए:

फोन वो खुशबू कहां से ला सकेगा,
वो जो आती थी तुम्हारी चिट्ठियों से।

मुशायरे की अपार सफलता पर संस्थापक शिवम झा जी ने सभी आमंत्रित गजलकारों व श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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