कवितासाहित्य

नमन-वन्दन माँ महागौरी

__सतेन्द्र शर्मा ‘तरंग’

नवरात्र अष्टमी पर हम माँ दुर्गा की ममता पायें।
अष्टमी पर महागौरी का पावन दरबार सजायें।।

गौर वर्ण की माता करें धारण श्वेत वस्त्राभूषण।
वृषभ पर होके सवार गौरी भक्तों को दें दर्शन।।
नारियां चुनरी चढ़ाकर माँगे सुहाग का वरदान।
डमरू और त्रिशूल लिए माता देती अभयदान।।
महागौरी के पूजन से नौ देवियाँ प्रसन्न हो जायें।
अष्टमी पर महागौरी का पावन दरबार सजायें।।

महागौरी के चरणों में जो भक्त शीश झुकाते हैं।
अमोघ शक्ति वाली माता से शुभ फल पाते हैं।।
असत् का नाश कर माँ सत् का विकास करती।
जिस घर में हो पूजा माँ की सत्यप्रकाश भरती।।
पूर्वसंचित पाप नष्ट हों सबके कल्मष धुल जायें।
अष्टमी पर महागौरी का पावन दरबार सजायें।।

प्रीत की पुष्पमाला से गौरी करूँ मैं श्रृंगार तेरा।
मन में लेकर श्रृद्धा सजाऊँ भवन हर बार तेरा।।
हलवा-चना प्रसाद लाल चुनरी भी तुझे चढ़ाऊँ।
महावर, कुमकुम और मेहंदी माता तुझे लगाऊंँ।।
हे अम्बे! कृपा से तेरी सुख-समृद्धि मिल जायें।
अष्टमी पर महागौरी का पावन दरबार सजायें।।

सद्भावों से ज्योत जलाकर माँ तुझे नमन करूँ।
गीत गाऊँ उपवास रखूँ कथा तेरी श्रवण करूँ।।
तेरे रूप में आयीं कन्याएं जीमें मेरे हाथ से माँ।
एक बालक को भी भोजन कराऊँ साथ में माँ।।
रख तुझपे विश्वास हर विपदा से सब तर जायें।
अष्टमी पर महागौरी का पावन दरबार सजायें।।

नवरात्र अष्टमी पर हम माँ दुर्गा की ममता पायें।
अष्टमी पर महागौरी का पावन दरबार सजायें।।

सतेन्द्र शर्मा ‘तरंग’
देहरादून ।

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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