साहित्य

नवगीत

मधुर मधुर बहती हवाएँ
आया देखो मधुमास ।

थकी हुई साँस सी कम्पित
मधुर पराग कंठ रूँधा सा
तड़प रही मिलन को आतुर
नवल कोपल ओठ खुला सा
पतझड़ के बिखरे पत्तों पर
चल आया यहाँ उल्लास ।

मधुर मधुर बहती हवाएँ
आया देखो मधुमास ।

आम का बिरवा बौराया
मह मह चंपा विपिन राग
जीवन की कली इतराई
तुहिन बिन्दु सजला अनुराग
पास चल वो आती ध्वनियाँ
वासित गंध से सुवास ।

मधुर मधुर बहती हवाएँ
आया देखो मधुमास ।

बाजते मन में शहनाई
नव आशामयी फूल खिले
पेड़ पर छाई तरुणाई
प्रेम में हमको जीत मिले
ह्रदय में बसेरा उसी का
हमेशा रहता आस पास

मधुर •••
आया ••••

अनिता मंदिलवार “सपना”
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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3 Comments

  1. अप्रतिम रचना, बहुत-बहुत बधाई

  2. प्रकृतिक बहुत सुन्दर चित्रण । पाठ्यक्रमों में सामिल करने योग्य ।

  3. बेहद खूबसूरत रचना… जिसमें प्रकृति की मधुरता का सुन्दर वर्णन किया है। हृदय स्पर्शी रचना…👌👌😊😊💐💐

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