साहित्य

नवरात्र (देवी माँ के चरणों में अर्पित भाव-पुष्प )

मंगलाचरण

शिव-स्तुति

शिवजी तेरा रूप निराला,
गले में धारी सर्प की माला,
जय -जय भोले शिवशंकर

तूने पीकर जहर का प्याला,
सबके प्राणों में अमृत ढाला,
जय-जय भोले शिव शंकर।
सोहे शीश पर गंगा धारा,
पतितों को जिसने तारा
जय- जय भोले शिवशंकर।

अंधकार सी घनी जटाएंँ,
तेरे माथे पर लहराएंँ,
चंद्र भाल पर जगमग करता,
भक्ति की उजली राह दिखाए।
तन पर शोभित मृगछालला
शिवजी तेरा रूप निराला।
जय -जय भोले शिव शंकर।

डमरू का संगीत मनोहर,
त्रिशूल है शक्ति का सागर,
नंदी बना है धर्म का वाहन
भूत,यक्ष गण,नर्तन गायन,
अंगों पर भस्म रमाये,
औघड़ तू मतवाला।
जय -जय भोले शिव शंकर।

वाम भाग में गिरिजा सोहे,
रूप पावन जन-जन मन मोहे।
धवल कैलाश शिखर पर राजे,
कार्तिक -गणपति गोद विराजे,
छिटका करूणा का उजियाला।
ओ शिव जी तेरा रूप निराला,
जय -जय भोले शिव शंकर।


आओ माँ कल्याणी


आओ माँ कल्याणी वरदा,
करो प्लावित नेह पसारा।
जग के कण कण में फैले माँ
तव करूणा की पावन धारा

तुम आदिशक्ति, तुम हो जगदंबा।
असुर मर्दिनी,तुम माँ दुर्गा।
भय -संताप जगती का हर कर ,
बहा शांति का निर्मल निर्झर।
जग के कण- कण में फैले माँ
तव करुणा की पावन धारा।
आओ माँ कल्याणी, वरदा,
करो प्लावित नेह पसारा।।

मोह-माया में भटक-भटक कर,
मैंने जीवन व्यर्थ गंँवाया ।
तमस भरी रात अब बीती,
मन में तेरा रूप समाया।
अंतर हुआ आलोकित मेरा,
टूटी संशय की जड़ कारा।
आओ माँ कल्याणी वरदा,
करो प्लावित नेह पसारा।

तेरे दर्शन को आतुर मैं,
बैठा हर पल आस लगाए।
आकर दरश दिखा दो मैया,
बिन तेरे, मुझे चैन न आए।
वरदहस्त अब रखो शीश पर,
दे दो मुझको सबल सहारा।
आओ माँ,कल्याणी सुखदा,
करो प्लावित नेह पसारा।

मन में लगन ,तेरी अब लागी,
याचक बन तेरे दर पर आया।
मेरी बिगडी़ बात बना दो,
सबने ही मुझको ठुकराया।
शरणागत की लाज बचा लो,
पतित- पावनी नाम तिहारा।
आओ माँ कल्याणी वरदा,
करो प्लावित नेह पसारा।।
जग के कण कण में फैले माँ
तव करुणा की पावन धारा।

अभिनंदन

आओ माँ ,
भगवती,शुभदा,
जगतजननी देवी।
तेरे स्वागत में मैंने,
हैं अपने पलक बिछाए।
मेरे मन का साज प्रतिपल।
राग तेरा ही गाए।
भाव-पुष्प भरे हैं मैंने,
अपनी श्रद्धा-अंजलि में।
तेरे अर्घ्य हेतु मैंने,
प्रेमाश्रु बहाए।
अगरु-चंदन से
यह श्वास सुवासित ।
यह पावन परिवेश
हुआ माँ,
तव महिमा से
आच्छादित।
इस सृष्टि का
कण-कण मैया
तव कृपा से आप्लावित।
आओ,आओ
माँ कल्याणी,
ताप-दग्ध जगती के उर पर
शीतलता का लेप करो।
अज्ञता, जड़ता,तिमिर हरो माँ,
जागृत विवेक-आलोक करो।

आत्म निवेदन

मैया जी मेरी चिट्ठी पढ़ लेना।
मैया जी मेरी चिट्ठी पढ़ लेना।

मैंने इसमें अपनी करनी बखानी,
अब तक जो भी की नादानी,
सारी सच- सच कही कहानी,
भाव तू जाने मन के मैया,
शब्दों पर ध्यान न देना।
मैया जी मेरी चिट्ठी पढ़ लेना।

चिट्ठी मेरी सीधी- साधी,
मेरे मन की बात बताती,
मैं हूंँ मूरख और अज्ञानी,
तू मेरी लाज रख लेना।
मैया जी मेरी चिट्ठी पढ लेना।

चिट्ठी पढ़कर दंड जो दे तू,
उसे मैं सिर आंँखों पर रख लूँ,
चरणों में बैठा सिर को झुकाए,
मेरी बांँह पकड़ तू लेना।
मैया जी मेरी चिट्ठी पढ़ लेना।

मैया मेरी तू बड़ी दयालु,
पतितपावनी है तू मैया
मैं भूला भटका राही हूंँ,
तू कृपा की कर दे छैया।
मुझे किसी से कुछ न लेना,
मैया जी मेरी चिट्ठी पढ़ लेना।

मैंने इसमें अपनी करनी बखानी,
की अब तक जो भी नादानी,
सारी सच सच कही कहानी,
भाव तू जाने मन के मैया,
शब्दों पर ध्यान न देना।
मैया जी मेरी चिट्ठी पढ़ लेना।

सपने में आईं मैया

कल मैया मेरे सपने में आई,
देखा तो मेरी नींद खुल गई।
जगकर चारों तरफ निहारा,
मैया तू कहांँ गई।

आंँसू आंँखों में भर भर आए,
दर्शन न मैया के पाए।
मैंने बारम्बार पुकारा,
मैया तू किधर गई।

मेरे मन में भक्ति जगा दे,
मुझको अपना दरस दिखा दे,
मुझे सच्चा पथ दिखला दे,
कैसे पाऊंँ दरस तुम्हारा,
मुझे कोई तो जुगत बता दे।

तेरी छवि ने मोहिनी डारी,
मेरा सर्वस्व तुझ पर वारी,
तेरे चरणों में मैं बलिहारी,
चाहूंँ कृपा दृष्टि तुम्हारी,
मैया तू किधर गई।

आजा फिर से दरस दिखा दे,
मेरी बिगड़ी बात बना दे,
मेरा जीवन सफल करा दे,
मेरी अंँखियांँ बरस रही हैं
तू अपना दरस दिखा दे।
मैया तू किधर गई।

मैया मेरी बड़ी दयालु
मैया मेरी बड़ी कृपालु,
मुझे हाथ पकड़ ले आई,
ऊँचे शिखरों पर जोत जगाई,
जय हो,जय हो तेरी माई,
मैया मेरी बनी सहाई,
मैया मुझे दरस दिखा दे,
मैया मेरी तू किधर गई।

स्तुति

मैया जी मुझे नौकर रख ले।
नौकर बन तेरा अंगना बुहारूंँ,
हर पल तेरे चरण पखारूंँ,
तेरे उपवन बाग संवारूंँ,
मैया जी मुझे नौकर रख ले।

नौकर बन तेरा भोग पकाऊंँ,
हाथ से अपने तुझे खिलाऊंँ,
सबको दूंँ प्रसाद,
मैं भी तेरी जूठन पाऊंँ
हर पल तुझपर ,बलि-बलि जाऊँ,
मैया जी मुझे नौकर रख ले।

तेरा सुंदर रूप निहारूंँ,
जोत जलाऊंँ तेरी आरती उतारूंँ,
झूम-झूम कर नाचूँ गाऊंँ,
हर पल तेरा दरसन पाऊंँ,
मैया जी मुझे नौकर रख ले।

नौकर बनूंँ तेरा,
मेरी आस हो पूरी।
मेरे तेरे बीच की मैया,
मिट जाए दूरी।
शरण में तेरी आऊंँ,
अपना जीवन सफल बनाऊंँ,
मैया जी मुझे नौकर रख ले।

स्तुति

मैया मेरी तू श्यामल घटा,
हम चातक तेरे,
कृपा कण बरसा दे।
मैया मेरी प्यास बुझा दे।
हम हैं तेरे दरस के प्यासे,।
मुझे दरस दिखा दे।
नयन सफल हों मेरे,
मैया जी हम चातक तेरे।

मैया मेरी तू ठंडी हवा,
हम हैं दुखी घनेरे,
शीतल छाया छा दे,
दुःख संताप मिटा दे,
मोह माया में उलझे मन की
मैया नैया पार लगा दे।
कटें भवबंधन मेरे,
मैया जी हम चातक तेरे।

मैया तू ज्योति अपार,
हम हैं घनघोर अंधेरे।
उजली छटा दिखा दे
ज्ञान किरण छिटका दे,
भटक- भटक हम हारे,
मैया सच्ची राह दिखा दे,
पाऊंँ जिससे दर्शन तेरे,
मैया जी हम चातक तेरे।

मैया मेरी तू जगदंबा,
हम बालक तेरे।
रो रोकर हुए बेहाल,
मैया गले लगा ले।
रख सिर पर अपना हाथ,
मैया अब लाड़ लडा ले
आए शरण में तेरे,
मैया जी हम बालक तेरे,
कृपा- कण बरसा दे,
मेरी प्यास बुझा दे,
मैया जी हम चातक तेरे।

स्तुति

सुबह का भूला,
जो लौट शाम को आए,
वो भूला नहीं कहलाता।
मैया मुझे माफ कर दे,
तेरा मेरा जन्मों का नाता।
ओ मैया मुझे माफ कर दे।

मैं तो था मूरख अज्ञानी,
तेरी भक्ति की राह न जानी,
उल्टी -सीधी राह पर चलता,
पल पल ठोकर खाता।
मैया जी मुझे माफ कर दे,
तेरा मेरा जन्म -जन्म का नाता।

मैं तो था जन्मों का पापी,
मोह माया के जाल में उलझा,
हर दम करता आपाधापी
मेरा तेरा करते-करते,
जीवन व्यर्थ गंँवाता।
मैया जी मुझे माफ कर दे,
तेरा मेरा जन्म- जन्म का नाता।

मैं तो था किस्मत का मारा,
जान न पाया तेरा द्वारा।
भव सागर की लहरों में आकुल,
मैं रहा डूबता उतराता
अब तेरी शरण में आया।
मैया जी मुझे माफ कर दे,
तेरा मेरा जन्म- जन्म का नाता।

सुबह का भूला ,लौट शाम को आए,
तो भूला नहीं कहलाता।
मैया जी मुझे माफ कर दे,
तेरा मेरा जन्मों का नाता।

मैं तो था मैया नींद में सोया,
सबके आगे हाथ फैलाया,
तेरे आगे न दुखड़ा रोया।
अब भूल समझ मुझे आई,
अब कर दे माँ बेड़ा पार
मैया जी मुझे माफ कर दे।
तेरा मेरा जन्म जन्म का नाता।

बिन कहे तू सुन ले पुकार

कैसे तुझे रिझाऊँ,
मैया मैं समझ न पाऊंँ।
बिन कहे तू सुन ले पुकार
तू तो घट घट वासी मैया।
मैं तो सोच सोच गया हार,
अब थाम ले मेरी बईयाँ

कोई कहे तेरी महिमा सुनूंँ मैं,
महिमा सुन उसे निसि दिन गुनूंँ मैं,
सुन महिमा तेरी चकित हुआ मैं,
महिमा का तेरी आर न पार।
मैं तो सोच सोच गया हार,
बिन कहे तू सुन ले पुकार।
तू घट घट वासी मैया।

कोई कहे तेेरे गुण मैं गाऊँ
गुण गा -गा जीवन धन्य बनाऊंँ,
गुण गा गा मेरे शब्द चुक गए,
गुण तेरे अपरम्पार,
मैं तो सोच सोच गया हार।
बिन कहे तू सुन ले पुकार
अब थाम लै मेरी बईयाँ
तू घट घट वासी मैया।

कोई कहे तेरा ध्यान धरूँ मैं
निसि दिन तेरा जाप करूँ मैं,
करत -करत जप रसना थक गई,
सधा न मन का तार।
मैं तो सोच – सोच गया हार,
अब थाम ले मेरी बईयाँ
तू घट -घट वासी मैया।

कोई कहे करूँ चरणों की पूजा,
इस बिन कोई काम न दूजा।
चरण कमल तेरे निर्मल-पावन
आंसू से रहा पखार
मैं तो सोच सोच गया हार।
अब थाम ले मेरी बईयाँ
तू घट घट वासी मैया।

कोई कहे तेरी आरती उतारूंँ,
सब नैवैेेेद्य ले तुझ पर वारूंँ
किए तेरे सब श्रृंगार
तेरी आरती उतारी बार बार।
अब थाम ले मेरी बईयाँ।
तू घट घट वासी मैया।

कोई कहे तेरे वंदन से मैया,
पूरी हो मन की आशा मैया।
मैं वंदन करूँ नित मेरा।
तेरे दर पे लगाऊंँ नित फेरा
पाया न तेरा दीदार,
अब थाम ले मेरी बईयाँ।
तू घट घट वासी मैया।

कोई कहे तेरा दास बनूंँ मैं,
तेरी कृपा की अरज करूँ मैं,
तेरी दया दृष्टि का प्यासा,
मन व्याकुल हुआ अपार,
अब थाम ले मेरी बईयाँ।
तू घट घट वासी मैया।

कोई कहे तुझसे प्रीति लगाऊंँ
प्रीति लगाकर तुझे रिझाऊंँ,
मैया तुझ पर बलि- बलि जाऊँ,
कर ले मुझे स्वीकार
अब थाम ले मेरी बईयाँ
तू घट घट वासी मैया।

रास्ते अनेक मैया तुम तक जाएँ,
मुझको कुछ भी समझ न आए,
मैया अब तो तू ही उबार,
कर दूर मेरा अहंकार।
अब थाम ले मेरी बईयाँ।
तू घट घट वासी मैया।
बिन कहे तू सुन ले पुकार,
लगा मेरा बेड़ा पार।
तू घट घट वासी मैया ।

कब तेरे दर्शन होंगे

तेरे भुवन का ऊँचा द्वारा,
मैं तो चलते चलते हारा,
कब तेरे दर्शन होंगे।
वह सुंदर समय कब आएगा,
जब तेरे दर्शन होंगे।

दुनिया के इस मोह जाल में
मैं तो अटक रहा था।
कस्तूरी की गंध के पीछे
मृग सम भटक रहा था।
कब देगी मैया सहारा,
कब तेरे दर्शन होंगे।
वह सुंदर समय कब आएगा,
जब तेरे दर्शन होंगे।

जन्म दिया तूने हीरे जैसा,
मैंने इसकी कदर न जानी,
बचपन खेल कूद में खोया,
हास विलास में गई जवानी।
अब काल खड़ा जब सिर पर,
मैं हाथ मल मल पछताया,
कब तेरे दर्शन होंगे
वह सुंदर समय कब आएगा,
जब तेरे दर्शन होंगे
मैया तेरे दर्शन होंगे।

दुनिया सारी आनी जानी,
मरम की मैंने बात न जानी
परनिंदा स्वारथ में खोया,
कभी किसी की सीख न मानी,
अब तेरी शरण मैं आया,।
कब तेरे दर्शन होंगे।
वह सुंदर समय कब आएगा
जब तेरे दर्शन होंगे।

पाकर तेरे दर्शन मैया,
जीवन सफल हो जाएगा मेरा,
बीत जाएगी रात अंधेरी,
हो जाएगा उजला सवेरा,
मन आनंद अद्भुत पाएगा,
जब तेरे दर्शन होंगे।
वह सुंदर समय कब आएगा,
जब तेरे दर्शन होंगे,
मैया तेरे दर्शन होंगे।

अब मेरी बारी है

तूने हठि हठि अधम उधारे
अब मेरी बारी है।
तेरी मेरी ठनी लड़ाई
देखूं किसका पलडा भारी है।

मैंने पूरा जोर लगाया
बढ़ बढ़ कर मैंने पाप कमाया
कैसे करोगी बेडा पार,
नाव मेरी भारी है।
मैया जी अब मेरी बारी है।

छूकर मुझे तूने कंचन बनाया
तू तो पारस है मेरी मैया,
लाज से बैठा आंखे झुकाए,
तेरी शरण मैं आया मैया
जीती तू,मैं गया हार,
तेरी बलिहारी है।
अब मेरी बारी है।

बिन कहे हर मन की जाने,
नजरों में तेरी सब हैं बराबर,
हर दुखिया को पार लगाया
समदर्शी तू,तारन हारी है।
अब मेरी बारी है।

अब मैं तुझसे दूर न जाऊँ
अमृत चख लिया,विष क्यों चाहूँ,
तेरी शरण में गति है मेरी।
लगी धुन तेरी,जुड़ी मन -तारी है
तूने हठि -हठि अधम उधारे
अब मेरी बारी है।
तेरी मेरी ठनी लड़ाई।
देखूं किसका पलड़ा भारी है
अब मेरी बारी है।

समां वो कितना सुंदर होगा

मेरे मन में बसे तेरी सूरत,
हर सूरत में दिखेे तेरी मूरत
समां वो कितना सुंदर होगा।

तेरी जय जय कार पुकारूँ
तेरे चरणों पर सर्वस्व वारूंँ
तेरा सुंदर मुखड़ा निहारूंँ,
समां वो कितना सुंदर होगा।
मेरे मन में बसे तेरी सूरत
हर सूरत में दिखे तेरी मूरत
समां वो कितना सुंदर होगा।

जब जगमग जोत जगेगी,
जब दुख की रात कटेगी।
रिमझिम बरसेगी प्रेम फुहार,
समां वो कितना सुंदर होगा।
मेरे मन में बसे तेरी सूरत,
हर सूरत में दिखे तेरी मूूरत,
समां वो कितना सुंदर होगा।

जब तू मुझे हंसकर देखे
मेरे भाग के खुल जाएंँ लेखे,
मेरी नैया लगेगी जब पार।
समां वो कितना सुंदर होगा।
मेरे मन में बसे तेरी सूरत
हर सूरत में दिखे तेरी मूरत
समां वो कितना सुंदर होगा।

धाम बड़ा सुंदर है।

ऊँचे पर्वत पर बना तेरा धाम
धाम बड़ा सुंदर है।
यहाँ हर पल गूंँजे तेरा नाम
धाम बड़ा सुंदर है।

जो भी आए यहाँ दुखियारा
मैया पाए तेरा सहारा
तेरे मंदिर की उजली ज्योति
कर दे जगमग जग सारा
जगमग जगमग करता
धाम बड़ा सुंदर है
यहाँ हर पल गूंजे तेरा नाम
धाम बड़ा सुंदर है।

शीतल -शीतल बहती हवाएँ,
तेरी महिमा ,तेरे गुण गाएंँ
मन आनंद से भर जाए।
जीवन सुफल हो जाए।
सब हँस- हँस प्रेम लुटाएंँ
मधुर कैसा मंजर है।
ऊँचे शिखरों पर बना तेरा धाम,
धाम बड़ा सुंदर है।

तेरी शरण में माँ जो आए,
दुःख सारे मिट जाएँ
तेरी कृपा का सूरज दमके।
तो किस्मत सबकी चमके
सब भेद भाव मिट जाएँ,
किरणें फैली मनहर हैं।
ऊँचे पर्वत पर बना तेरा धाम
धाम बड़ा सुंदर है।
यहाँ हर पल गूंँजे तेरा नाम,
नाम बड़ा सुंदर है।

वीणा गुप्त
नई दिल्ली
८/१०/२०२१

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