कवितासाहित्य

नारी हृदय पीड़ा


हाय रे! खुदारा कैसो जीवन बनायो,
माटी के तन पर कितनो जुल्म सब ढायो।
सब एथे मतलब से जुडत , न है कोई आपन चाहे सब कुछ गवायो।।
हाय रे! खुदारा कैसो जीवन बनायो,
कोई भी न होवत आपन चाहे आपन शीश चढायो ।
हाय रे! खुदारा नारी काहे तुमने बनायो, उस पर किस्मत ऐसो सजायो।।
बिन नर – नारी जियत नाही,
जो नारी – नर बिन जियत चाहि ओको जग जियत देत नाही।
सब ओ नारी पर लानछन लगायों।।
कहत सजनवा तू मोर सजनियो वो भी रखत तन से यारी।
हाय रे! खुदारा कैसो जीवन
बनायो,मोर माटी के तन पर कितनो जुल्म है ढायो । ।
सब चलावत अपनो हुकूमत एक बार मोर मन न जानत कोई,बाबा कहे तू मोर है बिटिया जहा ओथे तोर है दुनिया।
मैय्या कहत जनम हम तोहके दीयही आज तू ही मोर कर्ज उतारो।।
जहाँ कहत बाबा ब्याह करी तू ऊहे कुल राखो।
दुःख होवे जब पिया घर जाये, कहत पियर इहाँ कुछ तोहर नाही।।
हाय रे! खुदारा आपन हृदय पीड़ा काके सुनाई ।
गयो संसार से जब पिया माँग म्हारी सुनी करही, ऊह सजा नारी ही पायो।
सारा समाज नजर उठायो, हाय रे! खुदारा बड़ी कठिन डगर बनायो।।
देह माटी तन कितना सतायो, हाय रे! खुदारा काहे जीवन बनायो।।
जी करत विष खाय मरीबो , हाय रे! खुदारा कैसो जीवन बनायो।।
माटी के तन देखी सभी लुभायो।
कोई पीड़ा मोर न जाने हृदय हजारो बाँण चुभायो।।
हाय रे! खुदारा कैसो जीवन बनायो।
नाही बनत मोर जियत नाही प्राणो त्यागत जब चहबो मारही बाल – बच्चा नजर आयो।
हाय रे! मोर मवत न आयो।।
मोर जीवन के कागज़ काहे लमबों
बनायो, हाय रे! खुदारा कैसो जीवन बनायो।
जन्मी है बिटिया घणि मन पछतायो , हाय रे खुदारा कैसो जीवन बनायो।।
भय सतावे मोहे डर घनी लागे, कही मोर बिटिया के जीवन नरक न हो जावे।
हाय रे! खुदारा कैसो जीवन बनायो।।
कावित्रि – सुमन गुप्ता

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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