साहित्य

पतंग

शिखा अरोरा

तेरे मेरे प्यार की उड़ेगी पतंग ,
आ मिलकर भर दे जीवन में रंग |
पतंग के होते किनारे तीन,
कटे न दिन अब तेरे बिन |
मांजे से बंधती जैसे पतंग की डोर ,
तेरी मेरी यारी की ये लगती भोर |
तेरे मेरे…………………….

आसमान में ऊंची उड़ती जाए ,
लाज शर्म न अब मुझको आए |
हुई रे हुई पतंग बड़ी मशहूर ,
अब न रहे हम एक दूसरे से दूर |
तेरे मेरे…………………….

पतंग में लगी दो तीलियों से दोनों ,
प्रणय बंधन बांधेगे मिलकर दोनों |
ख्वाब हमारे पतंग से छोटे सनम ,
आगोश में तेरे रहना सातो जनम |
तेरे मेरे…………………….

कागज की रंगबिरंगी पतंग को देखो,
दिल में उठती हुई तरंग को देखो |
सबसे ऊंची उड़ेगी पतंग हमारी ,
मोहब्बत की लग गई हमें बीमारी |
तेरे मेरे…………………….

रंग- बिरंगे सपनों की यह दुनिया यार ,
पतंग जैसे न उड़े तो है बेकार |
हर किसी को पतंग होती प्यारी ,
बीते ऐसे ही जिंदगानी हमारी |
तेरे मेरे…………………….

शिखा अरोरा (दिल्ली)

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