कवितासाहित्य

पापा

__शहनाज़ बानो

कैसे भूलूं? तुम्हे पापा,
तुमने हर राह पर।
संघर्ष करना सिखाया,
तुमने सही गलत बताया।
मां ने जन्म देकर,
जीवन दिया था मुझको।
पर तुम्हारा संघर्ष ,
मां से कम नहीं था।
हमें पालने के खातिर,
धूप न बरसात देखी।
हमारी खुशियों के खातिर,
कभी न रात देखी।
पिता ने हमेशा सबसे,
आसूं छिपाएं हैं।
हमारे सपनो के खातिर,
अपने अरमान दबाएं है।
सबसे बढ़कर पूजा,
पिता की करती हूं।
पापा मैं तुमको आज भी,
हर पल याद करती हूं।
नही हो हमारे पास,
पर साथ होने का एहसास हुआ।
आज भी साथ देती हैं,
तेरी हर एक दुआ।

शहनाज़ बानो
उच्च प्राथमिक विद्यालय-भौंरी
चित्रकूट-उ० प्र०

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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