कवितासाहित्य

पाये तेरी गोद में, मैंने चारों धाम !!

__सत्यवान सौरभ

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तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।
सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास ।।
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माँ ममता की खान है, धरती पर भगवान ।
माँ की महिमा मानिए, सबसे श्रेष्ठ-महान ।।
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माँ वीणा की तार है, माँ है फूल बहार ।
माँ ही लय, माँ ताल है, जीवन की झंकार ।।
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माँ ही गीता, वेद है, माँ ही सच्ची प्रीत ।
बिन माँ के झूठी लगे, जग की सारी रीत ।।
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माँ हरियाली दूब है, शीतल गंग अनूप ।
मुझमें-तुझमें बस रहा, माँ का ही तो रूप ।।
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माँ तेरे इस प्यार को, दूँ क्या कैसा नाम ।
पाये तेरी गोद में, मैंने चारों धाम ।।

© सत्यवान सौरभ

(दोहा संग्रह तितली है खामोश से )

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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